सार्वजनिक-निजी भागीदारी रूपरेखा: राजकीय वृद्धाश्रमों का संचालन एवं प्रबंधन
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1. विनियामक संदर्भ और रणनीतिक अधिदेश
वरिष्ठ नागरिकों का कल्याण केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि एक विधिक अधिदेश है। 'माता-पिता तथा वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007' के अध्याय-3 की धारा-19 राज्य सरकार को चरणबद्ध तरीके से वृद्धाश्रम स्थापित करने का वैधानिक आधार प्रदान करती है। इसी अधिनियम की धारा-32 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राजस्थान सरकार ने 'नियम-2010' निर्मित किए हैं, जो इन आश्रमों के संचालन की विस्तृत कार्ययोजना निर्धारित करते हैं। राजस्थान सरकार का सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग इन दिशा-निर्देशों के माध्यम से एक सुरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने के लिए विनियामक ढांचे का प्रबंधन करता है।
रणनीतिक लक्ष्य और लक्षित श्रेणियां:
- परिभाषा और पात्रता: सेवा वितरण का मुख्य केंद्र 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वे 'वृद्ध' हैं जो 'निर्धन' श्रेणी में आते हैं।
- लक्षित लाभार्थी: इसमें वे वरिष्ठ नागरिक शामिल हैं जिनके पास स्वयं के भरण-पोषण के साधन नहीं हैं, और जो राज्य/केन्द्र की बी.पी.एल. (BPL) सूची या अन्त्योदय (Antyodaya) परिवारों की श्रेणी में पंजीकृत हैं।
- प्रवेश प्राथमिकता: असहाय, निराश्रित और बी.पी.एल. सूची से वंचित वृद्धों को संबंधित उपखण्ड अधिकारी की सहमति से बिना किसी भेदभाव के प्रवेश दिया जाता है।
नीतिगत आधार की इस स्पष्टता के पश्चात, द्वितीय चरण में उन संस्थाओं की पात्रता का विश्लेषण आवश्यक है जो इस सार्वजनिक सेवा वितरण में भागीदार बनना चाहती हैं।
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2. संस्थागत पात्रता और योग्यता मानदंड
वृद्धाश्रमों के सफल संचालन हेतु संस्थागत विश्वसनीयता प्राथमिक शर्त है। राज्य सरकार केवल उन्हीं संस्थाओं को उत्तरदायित्व सौंपती है जो न केवल विधिक रूप से सुदृढ़ हैं, बल्कि जिनका उद्देश्य पूर्णतः परोपकारी है।
अनिवार्य योग्यताएं और सामरिक प्रोत्साहन:
- विधिक ढांचा: संस्था का राजस्थान सोसाइटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम (या सोसाइटी एक्ट 1860), सार्वजनिक न्यास अधिनियम, या कंपनी अधिनियम के तहत 'गैर-लाभकारी' उद्देश्य के लिए पंजीकृत होना अनिवार्य है।
- ट्रैक रिकॉर्ड: संस्था के पास सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने का कम से कम 3 वर्षों का प्रमाणित अनुभव होना चाहिए। साथ ही, संस्था का प्रतिष्ठित और आर्थिक रूप से सुदृढ़ होना आवश्यक है।
- नैतिक अखंडता: किसी भी सरकारी निकाय द्वारा संस्था का कभी भी ब्लैकलिस्ट या दंडित न होना अनिवार्य है, जिसके लिए 'नॉन-जुडिशियल' शपथ पत्र देना होता है।
- रणनीतिक छूट (Strategic Relaxation): एक महत्वपूर्ण नीतिगत प्रावधान के तहत, यदि कोई संस्था प्रतिष्ठित, सुदृढ़ और ISO प्रमाणित है, तो राज्य सरकार चयन नियमों में वांछित शिथिलता प्रदान कर सकती है, जो उच्च गुणवत्ता वाले भागीदारों को आकर्षित करने के लिए एक प्रोत्साहन है।
संस्थागत पात्रता सुनिश्चित होने के बाद, चयन की एक पारदर्शी और बहु-स्तरीय प्रक्रिया आरंभ होती है।
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3. चयन प्रक्रिया और एम.ओ.यू. (MoU) प्रोटोकॉल
सार्वजनिक संसाधनों के इष्टतम उपयोग के लिए निजी भागीदारों का चयन एक सुव्यवस्थित प्रोटोकॉल के माध्यम से किया जाता है।
चयन प्रक्रिया का प्रवाह:
- विज्ञप्ति: निदेशालय स्तर से प्रतिष्ठित संस्थाओं के लिए सार्वजनिक विज्ञप्ति जारी की जाती है।
- जिला स्तरीय स्क्रीनिंग: जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति प्राप्त प्रस्तावों का परीक्षण करती है और अपनी अनुशंसा (निरीक्षण रिपोर्ट परिशिष्ट 'स' सहित) निदेशालय को भेजती है।
- राज्य स्तरीय मूल्यांकन: निदेशालय प्राप्त अनुशंसाओं का आर्थिक सुदृढ़ता और अनुभव के आधार पर सूक्ष्म परीक्षण करता है।
- अंतिम अनुमोदन: राज्य सरकार से अंतिम अनुमोदन प्राप्त होने के पश्चात ही चयन को आधिकारिक माना जाता है।
MoU और ब्रांडिंग मानक:
- अवधि: समझौता ज्ञापन (MoU) 2 वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी होता है, जिसे संतोषजनक कार्य होने पर आपसी सहमति से ठीक 1 वर्ष के लिए विस्तारित किया जा सकता है।
- अनिवार्य नामकरण: संस्था को आश्रम का नाम "राजकीय वृद्धाश्रम (संस्था/ट्रस्ट के सहयोग से संचालित)" रखना अनिवार्य है, जिससे राज्य के स्वामित्व और निजी सहयोग की स्पष्ट पहचान बनी रहे।
- हस्तांतरण पर रोक: चयनित संस्था अपनी इच्छा से संचालन किसी अन्य संस्था को हस्तांतरित या 'सब-कॉन्ट्रैक्ट' नहीं कर सकती।
चयन प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत, सारा ध्यान सेवा मानकों और परिचालन उत्कृष्टता पर केंद्रित होता है।
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4. सेवा वितरण बेंचमार्क और परिचालन मानक
वृद्धाश्रम में आवासित वृद्धों के लिए जीवन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु कड़े परिचालन मानक निर्धारित किए गए हैं।
प्रमुख परिचालन आवश्यकताएं:
- आवासीय क्षमता: प्रत्येक आश्रम की अधिकतम आवास क्षमता 25 वृद्धजनों तक सीमित है, ताकि व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित हो सके।
- न्यूनतम सुविधाएं: स्वच्छ पेयजल, पौष्टिक भोजन (प्रातः नाश्ते से रात्रि भोजन तक), मौसम के अनुकूल बिस्तर-वस्त्र, और दैनिक उपभोग की वस्तुएं (साबुन, तेल, दंत मंजन आदि)।
- विशेष सेवाएं: चिकित्सा देखभाल हेतु 'ऑन-कॉल' डॉक्टर के साथ-साथ फिजियोथेरेपिस्ट (Physiotherapist) और बाल काटने (Barber) जैसी विशिष्ट सेवाएं प्रदान करना अनिवार्य है।
- मनोरंजन: टीवी, समाचार पत्र, योग-प्राणायाम, धार्मिक पुस्तकें और आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से सक्रिय वातावरण।
- रखरखाव: राजकीय भवन का रंग-रोगन, बिजली-पानी के बिलों का भुगतान और करों की जिम्मेदारी पूरी तरह संस्था की होगी।
उच्च सेवा मानकों की इस निरंतरता के लिए एक स्पष्ट वित्तीय साझाकरण मॉडल क्रियान्वित किया जाता है।
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5. वित्तीय साझाकरण मॉडल और परिसंपत्ति स्वामित्व
इस मॉडल में राज्य सरकार अनुदान प्रदान करती है, जबकि परिचालन और अतिरिक्त व्यय का भार संस्था वहन करती है।
वित्तीय उत्तरदायित्वों का वर्गीकरण:
मद | राज्य सरकार का दायित्व | संस्था/ट्रस्ट का वित्तीय उत्तरदायित्व |
नियमित व्यय | निर्धारित मैस भत्ता, वस्त्र और आवास। | मैस भत्ते से अधिक का व्यय। |
विशेष अनुदान | स्वास्थ्य, मनोरंजन व रचनात्मक कार्यों हेतु एकमुश्त (Lump sum) राशि। | गंभीर बीमारी में रेफरल, अस्पताल लाने-ले जाने का समस्त खर्च। |
मानव संसाधन | - | 100% स्टाफ/कार्मिकों का वेतन और मानदेय। |
आवर्तक वस्तुएं | - | फर्नीचर, बर्तन, गद्दे और अन्य स्थाई/अस्थाई सामग्री। |
परिसंपत्ति स्वामित्व: अनुदान से सृजित या राजकीय भवन में जोड़ी गई किसी भी अतिरिक्त परिसंपत्ति (जैसे लिफ्ट, रैम्प या निर्माण) पर अंतिम स्वामित्व राज्य सरकार का ही होगा। यदि संस्था कोई निर्माण कराना चाहती है, तो उसे PWD के तकनीकी मानदंडों और राज्य की पूर्व सहमति का पालन करना होगा।
वित्तीय पारदर्शिता के साथ-साथ, साझेदारी की सफलता निरंतर निगरानी और उत्तरदायित्व पर निर्भर करती है।
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6. जवाबदेही, निगरानी और दंड विधान
एक सुदृढ़ PPP ढांचे में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बहु-स्तरीय निरीक्षण और सख्त दंडात्मक प्रावधान शामिल हैं।
निगरानी और ऑडिट:
- अनुदान की शर्त: अनुदान राशि का भुगतान केवल वास्तविक उपस्थिति पंजिका और विभागीय अधिकारी की संतोषजनक निरीक्षण रिपोर्ट (परिशिष्ट 'स') के आधार पर ही किया जाएगा।
- वित्तीय पारदर्शिता: संस्था को प्रत्येक वर्ष चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) द्वारा ऑडिट कराकर उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) जिला कार्यालय को प्रस्तुत करना होगा। सरकारी खातों की जांच CAG द्वारा भी की जा सकती है।
दंडात्मक प्रावधान:
- अनियमितता पर कार्रवाई: MoU की शर्तों के उल्लंघन या अनुदान के दुरुपयोग की स्थिति में, निदेशक/आयुक्त को बिना पूर्व नोटिस के अनुबंध निरस्त करने का अधिकार है।
- वसूली: गबन या दुरुपयोग की गई राशि की वसूली 'राजस्थान पब्लिक डिमांड्स रिकवरी एक्ट 1952' के तहत की जाएगी।
- ब्लैकलिस्टिंग: दोषी संस्थाओं को भविष्य में किसी भी सरकारी योजना के संचालन हेतु स्थाई रूप से अपात्र घोषित किया जा सकता है।
यह रणनीतिक रूपरेखा वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक गरिमापूर्ण जीवन और सरकारी संसाधनों की सुरक्षा के बीच एक आदर्श संतुलन स्थापित करती है।
राजस्थान राजकीय वृद्धाश्रम: सेवा और सुविधाओं की मार्गदर्शिका (Service Guide)
राजस्थान राजकीय वृद्धाश्रम: सेवा और सुविधाओं की मार्गदर्शिका (Service Guide)
यह मार्गदर्शिका राजस्थान सरकार द्वारा संचालित राजकीय वृद्धाश्रमों में दी जाने वाली सेवाओं और नागरिक अधिकारों का एक आधिकारिक विवरण है। इसका उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों, उनके परिवारों और समाजसेवियों को राज्य द्वारा निर्धारित अनिवार्य मानकों (Mandatory Standards) से अवगत कराना है ताकि हमारे बुजुर्ग सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें।
1. परिचय और मिशन: सम्मानजनक जीवन का अधिकार
राजस्थान सरकार 'माता-पिता तथा वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007' एवं 'राजस्थान नियम, 2010' के नियम 10 व 19 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रतिबद्ध है। इन राजकीय वृद्धाश्रमों का मूल उद्देश्य केवल आश्रय देना नहीं, बल्कि प्रत्येक निवासी को "सुरक्षित, सुखद और गरिमामय" वातावरण प्रदान करना है।
मुख्य उद्देश्य:
- सामाजिक सुरक्षा और उल्लास: उपेक्षित वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षा के साथ-साथ उल्लासपूर्ण जीवन जीने के अवसर प्रदान करना।
- सर्वांगीण देखभाल: भोजन, वस्त्र, चिकित्सा और पोषण की उच्चतम गुणवत्ता सुनिश्चित करना।
- कानूनी अधिकार: अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप निराश्रित वृद्धों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति संरक्षण देना।
- आत्मसम्मान की रक्षा: वृद्धावस्था में आत्मनिर्भरता और गरिमा को बनाए रखने के लिए उपयुक्त परिवेश निर्मित करना।
इस मार्गदर्शिका के अगले भाग में हम यह समझेंगे कि इन राजकीय सुविधाओं का लाभ लेने के लिए पात्रता के अनिवार्य मानदंड क्या हैं।
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2. प्रवेश हेतु पात्रता: किसे मिल सकती है सहायता?
राजकीय वृद्धाश्रमों में प्रवेश के लिए पारदर्शिता और न्यायपूर्ण प्रक्रिया अपनाई जाती है। पात्रता के लिए निम्नलिखित अनिवार्य शर्तें (Checklist) निर्धारित हैं:
- [ ] आयु सीमा: आवेदक की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
- [ ] आर्थिक स्थिति: मुख्य रूप से निर्धन या साधनहीन वरिष्ठ नागरिक, जिनके पास स्वयं के भरण-पोषण हेतु पर्याप्त आय नहीं है।
- [ ] श्रेणी प्राथमिकता: केन्द्र या राज्य की बी.पी.एल. (BPL) सूची अथवा अन्त्योदय परिवार के सदस्य।
- [ ] विशेष सुरक्षा नेट: यदि कोई निराश्रित वृद्ध बी.पी.एल. सूची में नहीं है, तो संबंधित उपखण्ड अधिकारी (SDO) की सहमति के उपरांत उसे प्रवेश दिया जा सकता है।
- [ ] समानता का सिद्धांत: प्रवेश प्रक्रिया में जाति या धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव पूर्णतः वर्जित है।
पात्रता सुनिश्चित होने के बाद, आइए अब उन दैनिक सुविधाओं पर नज़र डालें जो हर निवासी का मूलभूत अधिकार हैं।
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3. पोषण और दैनिक आवश्यकताएं: आहार और स्वच्छता
प्रत्येक संस्थान को "न्यूट्रिशन फर्स्ट" और स्वच्छता के कड़े मानकों का पालन करना अनिवार्य है। निवासियों को दी जाने वाली दैनिक सुविधाओं का विवरण नीचे दिया गया है:
सुविधा का प्रकार | विवरण और अनिवार्य मानक |
पेयजल | प्रत्येक निवासी के लिए स्वच्छ और शुद्ध पेयजल की निरंतर उपलब्धता। |
ताजा आहार | सुबह का नाश्ता, दोपहर और शाम का ताजा, सुपाच्य और पौष्टिक भोजन। |
वस्त्र एवं बिस्तर | ऋतु (गर्मी/सर्दी) के अनुसार उपयुक्त वस्त्र, गद्दे, चादर और कंबल। |
व्यक्तिगत स्वच्छता | नहाने और कपड़े धोने का साबुन, तेल और दन्त-मंजन/पेस्ट की नियमित आपूर्ति। |
अन्य सेवाएँ | समय-समय पर बाल काटने (Hair-cut) और संस्थान की स्वच्छता का प्रबंधन। |
शरीर के पोषण के साथ-साथ, स्वास्थ्य की निरंतर रक्षा के लिए चिकित्सा व्यवस्था भी उतनी ही अनिवार्य है।
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4. चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएँ: आपातकालीन और सामान्य देखभाल
वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाएँ सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। राजकीय नियमों के अनुसार, चिकित्सा प्रबंधन के लिए निम्नलिखित 'प्रायोरिटी चार्ट' का पालन किया जाता है:
- नियमित स्वास्थ्य जांच: निवासियों के स्वास्थ्य की सामान्य निगरानी और प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) की चौबीसों घंटे उपलब्धता।
- ऑन-कॉलर डॉक्टर: आवश्यकतानुसार विशेषज्ञ डॉक्टरों को आश्रम परिसर में बुलाने की सुव्यवस्थित व्यवस्था।
- अस्पताल स्थानांतरण: गंभीर बीमारी या आपातकाल की स्थिति में निवासी को तत्काल निकटतम अस्पताल ले जाने की जिम्मेदारी संस्थान की होगी। इसका समस्त खर्च संचालन संस्था द्वारा वहन किया जाएगा।
- मर्यादापूर्वक विदाई: किसी निवासी की मृत्यु होने पर, यदि कोई सक्षम संबंधी न हो, तो उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सम्मानजनक तरीके से दाह-संस्कार/अंतिम संस्कार की व्यवस्था करना संस्थान का उत्तरदायित्व है।
शारीरिक स्वास्थ्य के अलावा, मानसिक स्फूर्ति और आध्यात्मिक शांति के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।
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5. मनोरंजन और आध्यात्मिक विकास: मन की खुशहाली
वृद्धावस्था में मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जुड़ाव बनाए रखना अनिवार्य है। इसके लिए संस्थान निम्नलिखित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करते हैं:
- सूचना एवं ज्ञान: दैनिक समाचार पत्र, पत्रिकाएं और सूचना के लिए टेलीविजन (TV) की उपलब्धता।
- आध्यात्मिक संवर्धन: मन की शांति के लिए विभिन्न धार्मिक और प्रेरक पुस्तकों का संग्रह तथा सत्संग की व्यवस्था।
- शारीरिक सक्रियता: नियमित योग, प्राणायाम और फिजियोथेरेपिस्ट की सेवाएं (आवश्यकतानुसार)।
- सामाजिक मनोरंजन: संगीत के उपकरण, भजन-कीर्तन और अन्य रचनात्मक गतिविधियाँ जो मानसिक तनाव को दूर कर उल्लास भरती हैं।
इन सभी सुविधाओं का संचालन एक सुरक्षित और पूर्णतः सुव्यवस्थित परिसर के भीतर किया जाता है।
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6. आवास और बुनियादी ढांचा: सुरक्षित निवास
राजकीय वृद्धाश्रमों का ढांचा सुरक्षा और सुगमता (Accessibility) के मानकों पर आधारित है।
Key Highlights: आवास की अनिवार्य विशेषताएँ
- क्षमता और सुरक्षा: प्रत्येक राजकीय वृद्धाश्रम भवन की क्षमता 25 निवासियों की है। परिसर अनिवार्य रूप से 'चारदीवारी युक्त' और सुरक्षित होना चाहिए।
- बुनियादी ढांचा: पर्याप्त कमरे, स्वच्छ शौचालय, स्नानागार और फर्नीचर (पलंग, कुर्सी आदि) की उपलब्धता।
- वित्तीय उत्तरदायित्व: बिजली-पानी के बिल, संपत्ति कर और भवन के रख-रखाव (रंग-रोगन/मरम्मत) का पूरा खर्च संचालन संस्था/NGO द्वारा वहन किया जाता है।
- कार्मिक प्रबंधन: आश्रम में कार्यरत सभी कर्मचारियों (कु़क, सफाईकर्मी, गार्ड आदि) के वेतन का भुगतान संस्था द्वारा किया जाता है, जिसका बोझ निवासियों पर नहीं डाला जा सकता।
अंत में, यह जानना आवश्यक है कि इन मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र कैसे कार्य करता है।
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7. उत्तरदायित्व और शिकायत निवारण: गुणवत्ता का भरोसा
संस्थान की पारदर्शिता और सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए एक कठोर 3-चरणीय निगरानी प्रक्रिया निर्धारित है:
- प्रशासनिक निरीक्षण: जिला कलेक्टर, विभागीय अधिकारी या उनके प्रतिनिधियों द्वारा समय-समय पर आश्रम का औचक निरीक्षण और व्यवस्थाओं की जांच।
- पारदर्शी दस्तावेजीकरण: आश्रम में निवासियों की उपस्थिति पंजीका (Attendance Register), स्टॉक रजिस्टर और लेखा पुस्तकों का नियमित संधारण अनिवार्य है। अनुदान इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर जारी किया जाता है।
- वित्तीय ऑडिट और स्वामित्व: चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) द्वारा वार्षिक ऑडिट अनिवार्य है। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अनुदान से सृजित सभी चल-अचल संपत्तियों का पूर्ण स्वामित्व राज्य सरकार का ही रहता है।
निष्कर्ष: राजस्थान सरकार के ये राजकीय वृद्धाश्रम 'सेवा परमो धर्म:' के आदर्श पर आधारित हैं। यदि कोई भी संस्थान इन मानकों का उल्लंघन करता है, तो निवासियों को अपनी बात विभागीय अधिकारियों के समक्ष रखने का पूर्ण अधिकार है। हमारा लक्ष्य है कि राज्य का प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक अपने जीवन के इस पड़ाव को आत्मसम्मान और सुरक्षा के साथ जिए।
राजकीय वृद्धाश्रमों के संचालन हेतु दिशा-निर्देश: एक विस्तृत ब्रीफिंग दस्तावेज
कार्यकारी सारांश
यह ब्रीफिंग दस्तावेज राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा जारी उन दिशा-निर्देशों का विश्लेषण करता है, जो स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) और ट्रस्टों के माध्यम से राजकीय वृद्धाश्रमों के संचालन के लिए तैयार किए गए हैं। इन नियमों का प्राथमिक आधार "माता-पिता तथा वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007" है। मुख्य निष्कर्षों के अनुसार, सरकार बुनियादी ढांचा (भवन) प्रदान करती है, जबकि चयनित संस्थाएं पारदर्शी और गैर-लाभकारी आधार पर दैनिक संचालन की जिम्मेदारी संभालती हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य निर्धन और असहाय वृद्धों को गरिमापूर्ण जीवन, सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है। संस्थाओं का चयन उनकी वित्तीय सुदृढ़ता और अनुभव के आधार पर एक सख्त प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है, जिसमें नियमित ऑडिट और सरकारी निरीक्षण के माध्यम से जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है।
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1. विधिक और प्रशासनिक ढांचा
वृद्धाश्रमों का संचालन एक सुव्यवस्थित विधिक ढांचे के भीतर किया जाता है ताकि वृद्धजनों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।
- संवैधानिक और विधिक आधार: ये दिशा-निर्देश "माता-पिता तथा वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007" के अध्याय-3 की धारा-19 और नियम-2010 की पालना में बनाए गए हैं।
- परिभाषाएं:
- वृद्ध: 60 वर्ष या उससे अधिक आयु का नागरिक।
- निर्धन/गरीब: वह वरिष्ठ नागरिक जिसके पास स्वयं के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं, या जो बी.पी.एल. (BPL) या अन्त्योदय सूची में शामिल है।
- स्वयंसेवी संस्था: वह संगठन जो पंजीकृत हो और किसी व्यक्ति विशेष के लाभ के लिए कार्य न करता हो।
2. योजना के उद्देश्य
योजना का मुख्य लक्ष्य समाज के वंचित वर्गों के वृद्धों को एक सुरक्षित और उल्लासपूर्ण वातावरण प्रदान करना है:
- गरिमापूर्ण जीवन: सभी वर्गों के निर्धन और असहाय वृद्धों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवास और भोजन उपलब्ध कराना।
- सर्वांगीण विकास: वृद्धों के शारीरिक (चिकित्सा), मानसिक (मनोरंजन), और आध्यात्मिक विकास हेतु विभिन्न गतिविधियों का संचालन करना।
- सामाजिक सुरक्षा: पंजीकृत ट्रस्टों और स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से एक सुरक्षित आश्रय स्थल प्रदान करना।
3. संस्थाओं/ट्रस्टों की पात्रता और चयन प्रक्रिया
सरकार ने संचालन के लिए संस्थाओं के चयन हेतु कड़े मापदंड निर्धारित किए हैं ताकि गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनी रहे।
संस्था हेतु पात्रता मानदंड
मानदंड | विवरण |
पंजीकरण | संस्था को सोसाइटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1860, सार्वजनिक न्यास अधिनियम, या कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत होना अनिवार्य है। |
अनुभव | आवेदन से कम से कम तीन वर्ष पूर्व से पंजीकृत और क्रियाशील होना चाहिए। |
वित्तीय स्थिति | संस्था आर्थिक रूप से सुदृढ़ और प्रतिष्ठित होनी चाहिए। |
उद्देश्य | संस्था के लक्ष्यों में वृद्ध कल्याण और वृद्धाश्रम संचालन शामिल होना चाहिए। |
प्रतिष्ठा | संस्था किसी भी सरकारी निकाय द्वारा काली सूची (Blacklist) में नहीं होनी चाहिए। |
चयन की प्रक्रिया
- विज्ञप्ति: निदेशालय द्वारा प्रस्ताव आमंत्रित करने के लिए सार्वजनिक विज्ञापन जारी किया जाता है।
- जिला स्तरीय समिति: जिला कलेक्टर द्वारा गठित समिति प्राप्त प्रस्तावों का परीक्षण करती है और अपनी अनुशंसा निदेशालय को भेजती है।
- मूल्यांकन: निदेशालय स्तर पर संस्था की आर्थिक स्थिति, अनुभव और पिछले कार्यों का मूल्यांकन किया जाता है।
- अनुमोदन और MOU: राज्य सरकार के अनुमोदन के बाद चयनित संस्था के साथ 'मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' (MOU) निष्पादित किया जाता है।
4. वृद्धाश्रम में प्रवेश हेतु पात्रता
वृद्धाश्रम में प्रवेश के लिए प्राथमिकता उन लोगों को दी जाती है जिन्हें सहायता की सबसे अधिक आवश्यकता है:
- 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के निर्धन वृद्ध।
- बी.पी.एल. श्रेणी के वृद्ध या वे जो निराश्रित और असहाय हैं।
- प्रवेश के मामले में जाति या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता है।
- असहाय स्थिति में संबंधित उपखण्ड अधिकारी की सहमति से भी प्रवेश दिया जा सकता है।
5. संचालन की मुख्य शर्तें और संस्था के उत्तरदायित्व
संस्था को वृद्धाश्रम का संचालन "बिना लाभ-हानि" (No Profit-No Loss) के आधार पर करना होता है।
- अनुबंध की अवधि: शुरुआत में भवन 02 वर्ष की अवधि के लिए दिया जाता है, जिसे आपसी सहमति से 01 वर्ष और बढ़ाया जा सकता है।
- आवासीय क्षमता: सामान्यतः संस्था को 25 वृद्धजनों की क्षमता के अनुसार संचालन करना होता है।
- वित्तीय प्रबंधन:
- संस्था को अनुदान के लिए अलग बैंक खाता रखना होता है।
- प्रतिवर्ष चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से ऑडिट कराना और उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) जमा करना अनिवार्य है।
- अनुदान से सृजित संपत्तियों पर मालिकाना हक राज्य सरकार का ही रहेगा।
- भवन रखरखाव: बिजली-पानी के बिलों का भुगतान और भवन की सामान्य मरम्मत संस्था की जिम्मेदारी होगी।
- कार्मिक: वृद्धाश्रम के संचालन हेतु आवश्यक कर्मचारियों की व्यवस्था और उनके मानदेय का भार संस्था स्वयं वहन करेगी।
6. प्रदान की जाने वाली न्यूनतम सुविधाएं
दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक वृद्ध को निम्नलिखित सुविधाएं मिलना अनिवार्य है:
- भोजन और पेयजल: स्वच्छ पेयजल, सुबह का नाश्ता, और दोनों समय ताजा, पौष्टिक व सुपाच्य भोजन।
- दैनिक आवश्यकताएं: बिस्तर, कपड़े, साबुन, तेल और मौसम के अनुसार आवश्यक सामग्री।
- स्वास्थ्य सेवाएं: नियमित प्रारंभिक चिकित्सा और गंभीर बीमारी की स्थिति में निकटतम अस्पताल ले जाने की व्यवस्था। साथ ही, योग और प्राणायाम की सुविधा।
- मनोरंजन: टीवी, समाचार-पत्र, पत्रिकाएं, धार्मिक पुस्तकें और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
- अंतिम संस्कार: किसी निवासी की मृत्यु होने पर, उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सम्मानजनक दाह-संस्कार की व्यवस्था करना।
7. वित्तीय सहायता
राज्य सरकार संचालन हेतु दो प्रकार की वित्तीय सहायता प्रदान करती है:
- आवर्ती अनुदान (Recurring): प्रति वृद्ध, प्रति माह निर्धारित दर पर मेस भत्ता और वस्त्र आदि के लिए।
- एकमुश्त राशि (Lump sum): स्वास्थ्य, विशेष देखभाल और रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रतिवर्ष एक निश्चित राशि।
- अन्य खर्च: इन अनुदानों के अतिरिक्त होने वाले सभी खर्चों का वहन स्वयं संस्था को करना होता है।
8. निरीक्षण और दंड विधान
प्रणाली में पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र स्थापित किया गया है।
- निरीक्षण: जिला कलेक्टर या उनके द्वारा नामित अधिकारी (जैसे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारी) समय-समय पर आश्रम का निरीक्षण करेंगे।
- रिकॉर्ड संधारण: संस्था को उपस्थिति पंजिका, कैश बुक, स्टॉक रजिस्टर और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों का नियमित संधारण करना होगा।
- अनुशासनात्मक कार्यवाही:
- नियमों की अवहेलना या अनुदान के दुरुपयोग पर MOU को तुरंत निरस्त किया जा सकता है।
- गबन या वित्तीय अनियमितता की स्थिति में "राजस्थान पब्लिक डिमांड्स रिकवरी एक्ट, 1952" के तहत वसूली की जाएगी।
- दोषी संस्था को भविष्य में किसी भी सरकारी योजना के लिए अपात्र घोषित कर दिया जाएगा।
राजकीय वृद्धाश्रम संचालन हेतु दिशा-निर्देश और शर्तें
विषय/श्रेणी | विवरण | पात्रता/शर्तें | आवश्यक दस्तावेज | प्रदान की जाने वाली सुविधाएं | वित्तीय सहायता/अनुदान | स्रोत |
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स्वयं सेवी संस्था/ट्रस्ट हेतु पात्रता एवं पंजीकरण | राजकीय वृद्धाश्रमों के संचालन हेतु संस्थाओं के चयन और कानूनी पंजीकरण के मानदंड। | संस्था 3 वर्ष पूर्व पंजीकृत (सोसाइटी/न्यास/कंपनी अधिनियम के तहत) हो, गैर-लाभकारी हो, उद्देश्य में वृद्ध कल्याण शामिल हो, ब्लैकलिस्टेड न हो और आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो। | पंजीकरण प्रमाण पत्र, नियम-संविधान, नवीनतम कार्यकारिणी सूची, पिछले 3 वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट, बैंक विवरण, आवेदन पत्र (परिशिष्ट-ब), निरीक्षण रिपोर्ट (परिशिष्ट-स)। | राजकीय भवन का उपयोग (निश्चित शर्तों के अधीन) करने की अनुमति। | पंजीकृत संस्थाएं ही सरकारी अनुदान (मैस भत्ता, वस्त्रादि, स्वास्थ्य एवं मनोरंजन राशि) प्राप्त करने हेतु पात्र होंगी। | [1] |
वृद्धाश्रम संचालन की शर्तें (MOU) | राज्य सरकार और चयनित संस्था के मध्य संचालन हेतु अनुबंध की विस्तृत शर्तें। | MOU 2 वर्ष के लिए (1 वर्ष विस्तार संभव), न्यूनतम 25 वृद्धों की क्षमता, लाभ-हानि रहित संचालन अनिवार्य। | अनुदान संबंधी अभिलेख, उपस्थिति पंजिका, कैश-बुक, स्टॉक पंजिका, उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC)। | भवन का रखरखाव, मरम्मत और बिजली-पानी बिल का भुगतान संस्था द्वारा किया जाना अनिवार्य है। | प्रति वृद्ध प्रतिमाह देय निर्धारित अनुदान राशि, जिसका उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है। | [1] |
वृद्धाश्रम में प्रवेश हेतु पात्रता | वृद्धाश्रम में रहने के इच्छुक वरिष्ठ नागरिकों के लिए निर्धारित प्रवेश मानदंड। | आयु 60 वर्ष या अधिक, निर्धन या स्वयं के भरण-पोषण में असमर्थ व्यक्ति, अथवा निराश्रित/असहाय (उपखण्ड अधिकारी की अनुशंसा पर)। | सर्वे सूची में नाम, फोटो, आधार कार्ड/पहचान-पत्र/राशन कार्ड, आयु प्रमाण पत्र, आय का स्व-घोषित प्रमाण पत्र। | सम्मानजनक आवास, पौष्टिक भोजन, पीने का पानी, बिस्तर-कपड़े, चिकित्सा सेवा, योग, मनोरंजन (TV, समाचार पत्र) और अंतिम संस्कार व्यवस्था। | सरकारी अनुदान के माध्यम से वृद्धों हेतु निःशुल्क आवास, भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाएं। |


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