नवजीवन योजना: राजस्थान सरकार के सामाजिक सुधार और पुनर्वास हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश

 

नवजीवन योजना: राजस्थान सरकार के सामाजिक सुधार और पुनर्वास हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश


यह ब्रीफिंग दस्तावेज़ राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित 'नवजीवन योजना' के संचालन दिशा-निर्देश-2015 का एक विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और विक्रय में लिप्त समुदायों का सामाजिक-आर्थिक उत्थान और पुनर्वास सुनिश्चित करना है।


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कार्यकारी सारांश

नवजीवन योजना राजस्थान सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है जिसका उद्देश्य अवैध शराब के व्यवसाय में लगे परिवारों और समुदायों को मुख्यधारा में लाना है। यह योजना केवल दंडात्मक कार्रवाई के बजाय सकारात्मक हस्तक्षेप जैसे कौशल प्रशिक्षण, शिक्षा, ऋण पर ब्याज अनुदान और बुनियादी ढांचा विकास पर केंद्रित है। योजना का संचालन राज्य स्तर पर एक मॉनिटरिंग समिति और जिला स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली कार्यकारी समिति द्वारा किया जाता है। योजना का वित्तपोषण मुख्य रूप से आबकारी राजस्व के एक निश्चित हिस्से (1 प्रतिशत) से किया जाता है। इसके प्रमुख घटकों में 40% बजट आधारभूत संरचना के लिए और 30% प्रशिक्षण एवं ऋण अनुदान के लिए आवंटित है।

1. योजना का परिचय और उद्देश्य

राजस्थान सरकार ने "नवजीवन योजना संचालन दिशा-निर्देश 2015" के माध्यम से उन समुदायों के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त किया है जो पारंपरिक रूप से या मजबूरीवश अवैध शराब के कारोबार से जुड़े हैं।

मुख्य उद्देश्य:

  • सामाजिक और आर्थिक विकास: लक्षित समुदायों के परिवारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना।
  • वैकल्पिक आजीविका: अवैध शराब के व्यवसाय को छोड़कर सम्मानजनक वैकल्पिक रोजगार के अवसर प्रदान करना।
  • अशिक्षा उन्मूलन: शिक्षा के माध्यम से इन समुदायों की अगली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित करना।
  • आधारभूत सुविधाएँ: उन बस्तियों में बुनियादी नागरिक सुविधाएँ उपलब्ध कराना जहाँ ये समुदाय निवास करते हैं।

2. पात्रता और लक्षित समुदाय

योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए विशिष्ट मानदंड और समुदायों को चिह्नित किया गया है:

  • पात्र व्यक्ति/परिवार: वे सभी व्यक्ति या परिवार जो अवैध शराब के निर्माण, भंडारण या विक्रय में लिप्त हैं और जिन्हें जिला कार्यकारी समिति द्वारा चिह्नित किया गया है।
  • विशिष्ट समुदाय: योजना मुख्य रूप से निम्नलिखित समुदायों पर केंद्रित है:
    • कंजर, सांसी, भाट, भांड, नट, राणा, डूम, ढोली।
    • मोगिया (मोग्या), बावरिया, बेड़िया, बागरिया, सिरकीवाला, चौबदार।

3. प्रशासनिक और निगरानी संरचना

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक द्वि-स्तरीय समिति संरचना का प्रावधान है:

क. राज्य स्तरीय मॉनिटरिंग समिति

इसकी अध्यक्षता सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री करते हैं। इसमें वित्त, गृह, शिक्षा, चिकित्सा और आबकारी विभागों के प्रमुख शासन सचिव सदस्य के रूप में शामिल होते हैं।

  • कार्य: बजट आवंटन की समीक्षा, लक्ष्यों की प्राप्ति की निगरानी और आवश्यकतानुसार नीतिगत संशोधन के सुझाव देना।

ख. जिला कार्यकारी समिति

इसकी अध्यक्षता जिला कलेक्टर द्वारा की जाती है। इसमें जिला पुलिस अधीक्षक, स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि, और जिला आबकारी अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल होते हैं।

  • कार्य: लाभार्थियों का चिह्नीकरण, कार्यों का अनुमोदन, और योजना की प्रगति की त्रैमासिक समीक्षा करना।

4. प्रमुख घटक और सहायता के प्रकार

योजना को कई महत्वपूर्ण स्तंभों पर संरचित किया गया है जो लाभार्थियों के जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करते हैं:

I. सर्वेक्षण और चिह्नीकरण

  • स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) और 'प्रेरकों' के माध्यम से पात्र परिवारों का घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया जाता है।
  • डाटा का कंप्यूटरीकरण किया जाता है ताकि भविष्य में फॉलो-अप सुनिश्चित हो सके।

II. कौशल प्रशिक्षण (Skill Training)

  • RSLDC के माध्यम से: राजस्थान कौशल आजीविका विकास निगम के माध्यम से व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
  • स्टाइपेंड (Stipend): प्रशिक्षण अवधि के दौरान चयनित व्यक्ति को ₹2,000 प्रति माह की वृत्ति अधिकतम तीन माह के लिए दी जाती है।
  • ट्रेड चयन: स्थानीय बाजार की मांग के अनुसार तीन-तीन ट्रेडों में प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जाती है।

III. आर्थिक सहायता और ऋण अनुदान

योजना के तहत बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जाता है और सरकार ब्याज पर अनुदान प्रदान करती है।

क्र.सं.

ऋण राशि (₹)

लाभार्थी द्वारा देय ब्याज

विभाग द्वारा प्रदत्त ब्याज अनुदान

1

50,000 तक

1 प्रतिशत

शेष ब्याज दर

2

50,000 से 2.00 लाख तक

2 प्रतिशत

शेष ब्याज दर

3

2.00 लाख से 5.00 लाख तक

4 प्रतिशत

शेष ब्याज दर

4

5.00 लाख से अधिक

बैंक ब्याज दर

शून्य

  • अधिकतम सीमा: ब्याज अनुदान की अधिकतम सीमा ₹50,000 प्रति लाभार्थी है।

IV. शिक्षा प्रोत्साहन

  • कोचिंग सहायता: प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे PMT, PET, MBA, MCA) की तैयारी के लिए कोचिंग लागत का 60% या अधिकतम ₹15,000 का अनुदान।
  • छात्रवृत्ति: पात्र बच्चों को पूर्व-संचालित छात्रवृत्ति योजनाओं और आवासीय विद्यालयों में प्रवेश की प्राथमिकता।
  • RTE के तहत पुनर्भरण: शिक्षा के अधिकार के तहत वंचित रहे बच्चों के प्रवेश पर होने वाले व्यय का पुनर्भरण योजना के माध्यम से किया जाता है।

5. आधारभूत संरचना विकास (Infrastructure Development)

योजना का एक बड़ा हिस्सा (40%) उन बस्तियों के विकास के लिए आरक्षित है जहाँ कम से कम 10 परिवार या 50 व्यक्ति अवैध शराब निर्माण में लिप्त हैं।

प्राथमिकता वाले कार्य:

  1. पेयजल: पेयजल लाइन विस्तार, टंकी निर्माण और हैंडपम्प।
  2. संपर्क: सीसी रोड, नाली निर्माण और पुलिया।
  3. सार्वजनिक सुविधाएँ: विद्युतीकरण, सामुदायिक भवन, और आंगनवाड़ी/स्वास्थ्य केंद्र निर्माण।
  4. स्वच्छता: शौचालयों का निर्माण और तालाबों की सफाई।

6. वित्तीय प्रावधान और बजट वितरण

योजना के सुचारू संचालन के लिए बजट का वितरण पूर्व-निर्धारित अनुपातों में किया जाता है:

क्र.सं.

घटक

बजट का प्रतिशत

1

सर्वे, प्रचार-प्रसार एवं फॉलोअप

15%

2

प्रशिक्षण एवं ऋण अनुदान

30%

3

शिक्षा

15%

4

आधारभूत संरचना विकास

40%

7. स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) और प्रेरकों की भूमिका

योजना के धरातल पर क्रियान्वयन में स्वयंसेवी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है:

  • पात्रता: संस्था कम से कम 3 वर्ष से पंजीकृत होनी चाहिए और उसकी वित्तीय स्थिति सुदृढ़ होनी चाहिए।
  • प्रेरक (Motivator): उसी बस्ती का निवासी जो लाभार्थियों को योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित करता है।
  • भुगतान: संस्थाओं को उनके द्वारा किए गए कार्य के परिणामों (Output) के आधार पर भुगतान किया जाता है।

8. मूल्यांकन और नवाचार

  • मूल्यांकन: योजना का प्रभाव जानने के लिए हर 3 वर्ष में एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा मूल्यांकन कराया जाना अनिवार्य है।
  • स्थानीय नवाचार: जिला कलेक्टर स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार नए नवाचार कार्यक्रम संचालित कर सकते हैं, जिसकी स्वीकृति राज्य सरकार से प्राप्त करनी होती है।
  • नियमों में शिथिलता: यदि किसी नई जाति को जोड़ने की आवश्यकता हो, तो राज्य सरकार की पूर्व सहमति और शैक्षणिक/आर्थिक स्थिति के विश्लेषण के बाद ही निर्णय लिया जा सकता है।
योजना का नाम
पात्रता मानदंड
मुख्य लाभ और सेवाएँ
क्रियान्वयन एजेंसियां
बजट आवंटन विवरण
निगरानी समिति का स्तर
स्रोत
राजस्थान नवजीवन योजना (2015)
ऐसे व्यक्ति या परिवार जो अवैध शराब के निर्माण, भण्डारण और विक्रय में लिप्त हैं तथा जिला कार्यकारी समिति द्वारा चिह्नित किए गए हों। इसमें विशेष रूप से कंजर, सांसी, भाट, भांड, नट, राणा, डोम, ढोली, मोगिया, बावरिया, बेड़िया, बागरिया, सिरकीवाला और चौबदार समुदायों के व्यक्ति पात्र हैं।
कौशल प्रशिक्षण, शिक्षा सहायता (छात्रवृत्ति और आवासीय विद्यालय), ऋण ब्याज अनुदान (ऋण पर  से  तक ब्याज देय), स्वरोजगार हेतु सहायता, आधारभूत संरचना विकास (पेयजल, सड़क, बिजली), और पुनर्वास हेतु वैकल्पिक अवसर।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम (RSLDC), जिला आबकारी अधिकारी, स्वयंसेवी संस्थाएं (NGOs), और जिला स्तरीय बैंकर्स समिति।
सर्वे, प्रचार-प्रसार एवं फॉलोअप: , प्रशिक्षण एवं ऋण अनुदान: , शिक्षा: , आधारभूत संरचना विकास: 
राज्य स्तरीय मॉनिटरिंग समिति (मंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की अध्यक्षता में) और जिला कार्यकारी समिति (जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में)।
[1]

यह दिशा-निर्देश प्रभावी रूप से 2015 से लागू हैं और पूर्व के सभी संबंधित आदेशों को अतिक्रमित करते हैं, जिससे राजस्थान में अवैध शराब के विरुद्ध एक संगठित सामाजिक-आर्थिक युद्ध का खाका तैयार होता है।


नवजीवन योजना: 

गैर-सरकारी संस्थाओं (NGOs) के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम मार्गदर्शिका - ब्रीफिंग डॉक्यूमेंट

कार्यकारी सारांश

यह दस्तावेज़ 'नवजीवन योजना' के अंतर्गत गैर-आवासीय कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन हेतु निर्धारित विस्तृत दिशा-निर्देशों का सार प्रस्तुत करता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य चयनित गैर-सरकारी संस्थाओं (NGOs) के माध्यम से लक्षित समूहों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें स्वरोजगार या रोजगार के अवसरों से जोड़ना है। चयन प्रक्रिया अत्यंत कठोर है, जिसमें संस्था की वित्तीय सुदृढ़ता, अनुभव और भौतिक संसाधनों को प्राथमिकता दी जाती है। प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण, योग्य प्रशिक्षकों की नियुक्ति और एक व्यवस्थित भुगतान संरचना (₹36.30 प्रति घंटा प्रति प्रशिक्षणार्थी) निर्धारित की गई है।

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1. गैर-सरकारी संस्थाओं (NGOs) की चयन प्रक्रिया और मापदंड

प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल कार्यान्वयन के लिए संस्थाओं का चयन जिला स्तरीय कार्यकारी समिति द्वारा किया जाता है। इसके लिए निम्नलिखित मापदंड अनिवार्य हैं:

  • पात्रता: संस्था कम से कम 3 वर्ष पुरानी होनी चाहिए और उसे प्रशिक्षण क्षेत्र में न्यूनतम 2 वर्ष का अनुभव होना चाहिए।
  • पंजीकरण: संस्था का सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, न्यास (Trust) अधिनियम या कंपनी एक्ट 2013 के अंतर्गत पंजीकृत होना अनिवार्य है।
  • प्राथमिकता: उन संस्थाओं को वरीयता दी जाएगी जिन्होंने नवजीवन परिवारों का सर्वे कार्य किया है।
  • वित्तीय सुदृढ़ता: संस्था आर्थिक रूप से सक्षम होनी चाहिए। इसका मूल्यांकन उनके पिछले तीन वर्षों के प्राप्ति-भुगतान खाते या ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा।
  • सुरक्षा राशि: इच्छुक संस्थाओं को ₹1,00,000 की बिड सिक्योरिटी राशि जमा करनी होगी। चयनित संस्था को ₹50,000 की निष्पादन सुरक्षा राशि भी जमा करानी होगी।

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2. कौशल प्रशिक्षण केंद्रों के लिए भौतिक और तकनीकी आवश्यकताएं

प्रशिक्षण केंद्रों पर गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विशिष्ट भौतिक मानकों का पालन करना आवश्यक है:

  • स्थान और बुनियादी ढांचा: केंद्र में प्रशिक्षणार्थियों की संख्या के अनुसार पर्याप्त लैब और क्लासरूम होने चाहिए। स्वच्छ पेयजल, बिजली और बिजली कटौती की स्थिति में पावर बैकअप की व्यवस्था अनिवार्य है।
  • साधन और उपकरण: चयनित संस्था को राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम के मानदंडों के अनुसार टूल किट (न्यूनतम मूल्य ₹1,250 प्रति प्रशिक्षणार्थी) और पर्याप्त कच्चा माल निःशुल्क उपलब्ध कराना होगा।
  • सुविधाएं: महिला प्रशिक्षणार्थियों के लिए पृथक शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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3. प्रबंधन और कार्मिक संरचना

प्रत्येक केंद्र के सुचारू संचालन के लिए एक व्यवस्थित टीम की आवश्यकता होती है:

केंद्र प्रभारी (Centre In-charge)

तीन या अधिक कार्यक्रमों के संचालन पर एक स्नातक/स्नातकोत्तर केंद्र प्रभारी नियुक्त किया जाएगा, जिसे कंप्यूटर (MS Office) और इंटरनेट का ज्ञान हो। उनके मुख्य उत्तरदायित्वों में शामिल हैं:

  • प्रशिक्षणार्थियों का मोबिलाइजेशन और काउंसलिंग।
  • प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज करना और विभाग को सूचना भेजना।
  • प्रशिक्षण के बाद स्वरोजगार हेतु मार्गदर्शन और बैंक ऋण में सहायता।

प्रशिक्षक (Instructors)

प्रशिक्षण की गुणवत्ता मुख्य रूप से प्रशिक्षकों की योग्यता पर निर्भर करती है:

  • मुख्य प्रशिक्षक: संबंधित क्षेत्र में डिग्री/डिप्लोमा और न्यूनतम 2 वर्ष का अनुभव।
  • सहायक प्रशिक्षक: संबंधित क्षेत्र में डिग्री/डिप्लोमा। यदि डिग्री नहीं है, तो 5 वर्ष का कार्य अनुभव अनिवार्य है।

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4. प्रशिक्षण कार्यक्रम का विवरण और ट्रेड

योजना के तहत स्थानीय मांग और बाजार की आवश्यकता के अनुसार विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षण दिया जाता है।

  • प्रमुख ट्रेड: सिलाई, ब्यूटी पार्लर, हैंडीक्राफ्ट्स, राजमिस्त्री (Masonry), घरेलू लाइट फिटिंग, डेयरी, रेडीमेड गारमेंट्स, प्लंबर, सुरक्षा गार्ड आदि।
  • बैच का आकार: एक बैच में न्यूनतम 15 और अधिकतम 25 प्रशिक्षणार्थी होंगे।
  • समय सीमा: प्रशिक्षण प्रतिदिन 6 घंटे (प्रातः 9:00 बजे से सायं 6:00 बजे के मध्य) संचालित होगा।

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5. वित्तीय संरचना और भुगतान प्रक्रिया

प्रशिक्षण की दरें राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम द्वारा ₹36.30 पैसे प्रति घंटा प्रति प्रशिक्षणार्थी निर्धारित की गई हैं।

भुगतान तालिका (नमूना)

क्र.सं.

कार्यक्रम की अवधि (दिन/घंटे)

प्रति प्रशिक्षणार्थी राशि (रुपये में)

1

15 दिवस / 90 घण्टे

3,267

5

29 दिवस / 170 घण्टे

6,171

10

45 दिवस / 270 घण्टे

9,801

15

92 दिवस / 550 घण्टे

19,965

20

114 दिवस / 680 घण्टे

24,684

26

190 दिवस / 1140 घण्टे

41,382

भुगतान की किश्तें:

  1. प्रथम किश्त (60%): कार्य स्वीकृति-पत्र जारी होने के समय।
  2. द्वितीय किश्त (40%): प्रशिक्षण पूर्ण होने, उपयोगिता प्रमाण-पत्र (UC) और समापन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद।

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6. निगरानी, लेखा परीक्षा और प्रमाणन

पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक बहु-स्तरीय समीक्षा तंत्र स्थापित किया गया है:

  • निरीक्षण: जिला कलेक्टर या उनके द्वारा नामित अधिकारी/सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा कम से कम दो बार औचक निरीक्षण किया जाएगा।
  • लेखा परीक्षा (Audit): संस्था को चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) द्वारा प्रमाणित उपयोगिता प्रमाण-पत्र और व्यय का विवरण प्रस्तुत करना होगा। इन रिकॉर्ड्स को कम से कम तीन वर्षों तक सुरक्षित रखना अनिवार्य है।
  • परीक्षा और प्रमाणन: प्रशिक्षण के अंत में 100 अंकों की एक घंटे की परीक्षा आयोजित की जाएगी (लघु उत्तर प्रकार के प्रश्न)। सफल प्रशिक्षणार्थियों को जिला कलेक्टर और जिला अधिकारी (SJED) के हस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे।
  • अनुवर्ती कार्रवाई (Follow-up): संस्था का यह उत्तरदायित्व होगा कि वह प्रशिक्षण के बाद लाभार्थियों को रोजगार दिलाने में मदद करे या बैंक के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराकर स्वरोजगार स्थापित करने में सहयोग दे।



नवजीवन योजना संचालन दिशा-निर्देश:

 2011 - ब्रीफिंग रिपोर्ट

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कार्यकारी सारांश

"नवजीवन योजना" राजस्थान सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री में संलिप्त व्यक्तियों और समुदायों का सामाजिक-आर्थिक उत्थान और पुनर्वास करना है। यह योजना मुख्य रूप से वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करने, अशिक्षा को दूर करने और लक्षित समूहों को मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। योजना का कार्यान्वयन तीन सुव्यवस्थित चरणों में किया जाता है: जागरूकता और पहचान, कौशल प्रशिक्षण, और अंततः ऋण एवं शिक्षा के माध्यम से पूर्ण पुनर्वास। इस योजना का वित्तपोषण आबकारी राजस्व की 1% राशि से किया जाता है, और इसका प्रबंधन राज्य एवं जिला स्तर की समितियों द्वारा किया जाता है।

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1. योजना के मुख्य उद्देश्य और लक्ष्य

योजना का मुख्य ध्येय अवैध शराब के दलदल में फंसे परिवारों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए संसाधन उपलब्ध कराना है। इसके मुख्य स्तंभ निम्नलिखित हैं:

  • आजीविका का परिवर्तन: अवैध शराब व्यवसाय के स्थान पर वैकल्पिक रोजगार के अवसर प्रदान करना।
  • शैक्षिक सुधार:क्षित समुदायों के बच्चों के लिए शिक्षा और कोचिंग की व्यवस्था करना।
  • बुनियादी ढांचा: उन क्षेत्रों में बिजली, सड़क और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित करना जहाँ ये समुदाय निवास करते हैं।
  • सामाजिक पुनर्वास: समुदायों को कुरीतियों से मुक्त कर समाज की मुख्यधारा में लाना।

2. पात्रता और लक्षित समुदाय

योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित श्रेणियां पात्र मानी गई हैं:

  • प्रत्यक्ष संलिप्तता: ऐसे व्यक्ति या परिवार जो अवैध शराब के निर्माण, भंडारण या विक्रय में लिप्त हैं।
  • विशिष्ट समुदाय: कंजर, सांसी, भाट, भांड, नट, राणा, डोम और ढोली समुदाय के व्यक्ति।
  • चिन्हित लाभार्थी: जिला कार्यकारी समिति द्वारा इस उद्देश्य के लिए विशेष रूप से चिन्हित कोई भी व्यक्ति या परिवार।

3. संगठनात्मक ढांचा और निगरानी

योजना के प्रभावी संचालन के लिए दो-स्तरीय निगरानी प्रणाली स्थापित की गई है:

राज्य स्तरीय मॉनिटरिंग समिति

  • अध्यक्ष: मंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग।
  • सदस्य: वित्त, गृह, चिकित्सा, शिक्षा और आबकारी जैसे प्रमुख विभागों के शासन सचिव।
  • कार्य: योजना की समीक्षा, बजट आवंटन की निगरानी और नीतिगत संशोधन के सुझाव देना। इसकी बैठक हर छह माह में एक बार आयोजित होती है।

जिला कार्यकारी समिति

  • अध्यक्ष: जिला कलेक्टर।
  • मुख्य सदस्य: जिला पुलिस अधीक्षक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (जिला परिषद), जिला आबकारी अधिकारी और अग्रणी बैंक अधिकारी।
  • कार्य: लाभार्थियों की पहचान, एनजीओ का चयन और योजना का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन। इसकी बैठक प्रति माह आयोजित की जाती है।

4. कार्यान्वयन के तीन चरण

योजना को व्यवस्थित रूप से तीन चरणों में विभाजित किया गया है:

प्रथम चरण: चिह्नीकरण और जागरूकता

  • स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों और जनसंख्या का सर्वेक्षण।
  • नुक्कड़ नाटक, सभाएं और मल्टीमीडिया प्रदर्शन के जरिए अवैध शराब के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता।
  • बजट: प्रति एनजीओ अधिकतम 3.00 लाख रुपये तक का अनुदान।

द्वितीय चरण: कौशल प्रशिक्षण

पात्र व्यक्तियों को वैकल्पिक रोजगार के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है।

  • प्रमुख व्यवसाय: परिवहन, टेलरिंग, कंप्यूटर ट्रेनिंग, डेयरी, मोटर बाइंडिंग, सौंदर्य प्रसाधन आदि (कुल 18+ विकल्प)।
  • प्रशिक्षण अवधि: अधिकतम 3 माह।
  • प्रशिक्षण भत्ता (Stipend): चयनित प्रशिक्षणार्थी को 2000 रुपये प्रति माह की वृत्तिका दी जाती है।
  • शर्त: प्रशिक्षणार्थी को एक शपथ-पत्र देना होता है कि वह स्वयं और अपने परिवार को अवैध शराब व्यवसाय से मुक्त रखेगा।

तृतीय चरण: पुनर्वास, शिक्षा और सुविधाएं

  • ऋण और अनुदान: SC/ST/OBC निगमों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराना। ऋण राशि का 25% या अधिकतम 50,000 रुपये (जो भी कम हो) अनुदान (Subsidy) के रूप में दिया जाता है।
  • शिक्षा:
    • ब्रिज कोर्स और आवासीय विद्यालयों का संचालन।
    • प्रतियोगी परीक्षाओं (PMT, PET, MBA आदि) के लिए कोचिंग हेतु लागत का 60% या अधिकतम 15,000 रुपये का अनुदान।
  • मूलभूत सुविधाएं: चिन्हित बस्तियों में बिजली, सड़क और पानी के लिए बजट। (संशोधन के अनुसार, अब कुल आवंटित बजट का 40% तक इस पर खर्च किया जा सकता है)।

5. वित्तीय और प्रशासनिक नियम

मद

विवरण

वित्तीय स्रोत

आबकारी राजस्व की 1% राशि

प्रशिक्षण बजट

40 दिन (240 घंटे) के लिए ₹52,333 से लेकर 90 दिन (540 घंटे) के लिए ₹1,09,092 तक

भुगतान प्रक्रिया

एनजीओ को दो किस्तों में (60% और 40%) भुगतान

निगरानी

उपयोगिता प्रमाण-पत्र (UC) और चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रमाणित ऑडिट रिपोर्ट अनिवार्य

6. स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) के लिए पात्रता मानदंड

योजना में भाग लेने वाली संस्थाओं के लिए निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य हैं:

  1. सोसाइटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1860 या अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत पंजीकृत।
  2. संस्था कम से कम तीन वर्ष से पंजीकृत और सामाजिक कार्यों में सक्रिय हो।
  3. संस्था का एक स्पष्ट संगठनात्मक ढांचा और परिभाषित शक्तियां होनी चाहिए।

7. आवेदन प्रक्रिया

इच्छुक व्यक्ति एक सादे कागज पर अपनी फोटो, शैक्षणिक योग्यता के प्रमाण और जाति प्रमाण-पत्र (यदि लागू हो) के साथ जिला अधिकारी को आवेदन कर सकता है। आवेदन में उस विशिष्ट व्यवसाय का उल्लेख करना आवश्यक है जिसमें आवेदक प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहता है।

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यह दस्तावेज़ "नवजीवन योजना संचालन दिशा-निर्देश: 2011" और उसके बाद के संशोधनों के आधार पर तैयार किया गया है।


राजस्थान नवजीवन योजना 2011 के दिशानिर्देशों का विवरण

योजना के चरण
मुख्य गतिविधियाँ
पात्र समुदाय/व्यक्ति
प्रदान की जाने वाली सहायता/अनुदान
कौशल प्रशिक्षण व्यवसाय के प्रकार
प्रशिक्षण अवधि और बजट
क्रियान्वयन/निगरानी संस्था
आवश्यक दस्तावेज
स्रोत
प्रथम चरण
अवैध शराब के व्यवसाय में लिप्त व्यक्तियों का चिह्नीकरण तथा जन जागृति एवं वैकल्पिक आजीविका हेतु प्रोत्साहन।
अवैध शराब के निर्माण, भंडारण एवं विक्रय में लिप्त परिवार; कंजर, सांसी, भाट, भाण्ड, नट, राणा, डोम एवं ढोली समुदाय।
स्वयंसेवी संस्थाओं (NGO) को कार्य-सम्पादन हेतु अधिकतम ₹3,00,000 तक का अनुदान।
लागू नहीं (प्रथम चरण जागरूकता हेतु है)
प्रथम किस्त 60% (स्वीकृति पर) और द्वितीय किस्त 40% (कार्य समापन पर)।
जिला कार्यकारी समिति (अध्यक्ष: जिला कलेक्टर) एवं स्वयंसेवी संस्थाएं (NGO)।
NGO द्वारा कार्ययोजना एवं बजट प्रस्ताव।
[1]
द्वितीय चरण
पात्र परिवारों के सदस्यों को वैकल्पिक रोजगार हेतु कौशल प्रशिक्षण (Skill Training) प्रदान करना।
अवैध शराब व्यवसाय से जुड़े पात्र परिवार/समुदाय जो कौशल प्रशिक्षण के इच्छुक हों।
प्रशिक्षण के दौरान लाभार्थियों को ₹2,000 प्रति माह की वृत्तिका (Stipend) का भुगतान।
परिवहन, मोजड़ी निर्माण, मणियारी, ब्यूटी पार्लर, हैंडीक्राफ्ट, रेडीमेड गारमेंट्स, कंप्यूटर, डेयरी, बैंड-बाजा, टेंट, विद्युत फिटिंग आदि।
अवधि: अधिकतम 3 माह (90 दिन)। बजट: ₹52,333 (40 दिन हेतु) से ₹1,09,092 (90 दिन हेतु) प्रति बैच।
राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI), रूडा (RUDA), जिला उद्योग केन्द्र, श्रम एवं रोजगार विभाग।
फोटो सहित आवेदन, शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, व्यवसाय छोड़ने हेतु शपथ-पत्र।
[1]
तृतीय चरण
प्रशिक्षित लाभार्थियों को ऋण/अनुदान उपलब्ध कराना, बच्चों की शिक्षा और बस्तियों में मूलभूत सुविधाएं प्रदान करना।
प्रशिक्षण प्राप्त लाभार्थी (SC, ST, OBC, सफाई कर्मचारी, दिव्यांग) एवं उनके स्कूल जाने वाले बच्चे।
ऋण राशि का 25% या अधिकतम ₹50,000 अनुदान; कोचिंग हेतु लागत का 60% या अधिकतम ₹15,000 सहायता।
व्यावसायिक पाठ्यक्रमों (PMT, PET, MBA, BCA, MCA आदि) हेतु कोचिंग।
मूलभूत सुविधाओं हेतु कुल आवंटित बजट की 40% तक की राशि का प्रावधान।
राज्य स्तरीय मॉनिटरिंग समिति, अनुजा निगम, शिक्षा विभाग और वाणिज्यिक/सहकारी बैंक।
ऋण आवेदन पत्र, आय प्रमाण पत्र, अंकतालिका (कोचिंग हेतु न्यूनतम 60% अंक अनिवार्य)।
[1]


यह दस्तावेज़ "नवजीवन योजना संचालन दिशा-निर्देश: 2011" और उसके बाद के संशोधनों के आधार पर तैयार किया गया है।


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